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पुस्तक समीक्षा
‘शब्दों को विश्राम कहां ‘ 2021
लेखिका: संतोष गर्ग
सामाजिक चेतना की भावनाओं को अभिव्यक्त करती कविताएँ
समीक्षक: प्रेम विज, संपादक जागृति (पूर्व) चंडीगढ़
कवयित्री संतोष गर्ग ने 16 पुस्तकें लिखकर हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है। मेरा वर्षों से उनके साथ परिचय है। व्यक्तिगत रूप से भी और साहित्यिक रूप से भी। प्रख्यात आलोचक इंद्र नाथ मदान का कथन है कि लेखिका का व्यक्तित्व उसके लेखन में भी मिलता है। ऐसे ही मुझे इस कवयित्री के जीवन में विनम्रता, अध्यात्मिकता, सेवा, समर्पण, लगन, निष्ठा सब कुछ देखने को मिला है और इनके लेखन में भी इन्हीं गुणों की झलक मिलती है।
वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रूप देवगुण इनकी कविताओं के बारे में लिखते हैं कि संतोष गर्ग की मां, प्रेम तथा देश से संबंधित लगभग सभी लघु कविताओं में भावों की प्रधानता है। वरिष्ठ साहित्यकार डा. कैलाश आहलुवालिया ने कविताओं का विश्लेषण करते हुए लिखा है कि संतोष गर्ग के काव्य संग्रह की कविताएँ आकार में भले ही छोटी है पर उनमें व्याप्त चिताएं वास्तव में बड़ी हैं।
मैं संतोष गर्ग की काव्य यात्रा का सहचर रहा हूँ और महसूस किया है कि कृति दर कृति उनके विचारों में विस्तारता और प्रौढ़ता आई है। कवयित्री ने लगभग हर
परिवार के साथ परिवेश को ही खुली आँख से देखा है। सपने, जल, पर्वत, प्रकृति और देश- प्रेम जैसे महत्वपूर्ण विषयों के साथ-साथ कवयित्री ने सम सामायिक समस्या कोरोना पर भी कविताएँ लिखी हैं।
‘शब्दों को विश्राम कहाँ ‘ संतोष गर्ग का तीसरा काव्य संग्रह है। इस काव्य संग्रह में 101 कविताएँ हैं। कवयित्री ने अब तक की प्रकाशित पुस्तकों में साहित्य की सभी विधाएँ जैसे: कविता, डायरी, लघु कथा, यात्रा, बाल उपन्यास, बाल कविताएँ, अध्यात्मिक चिंतन पर लिखा है।
पिता परिवार का आधार होता है जिस पर पूरा परिवार निर्भर रहता है। पिता परिवार घर की जरूरतों को पूरा करते- करते अपनी आवश्यकताओं को भूल जाते हैं। वे पर्वत की तरह होते हैं जो परिवार पर कोई भी संकट नहीं आने देते। ‘पिता’ कविता की इस पंक्तियों के यह भाव देखिए: पर्वत होते हैं पिता से / पिता होते है पर्वत से/ जिन पर नहीं पड़ता कोई प्रभाव/ छोटी- मोटी मार का..।
मां के ऊपर संग्रह में अनेक कविताएँ हैं। वह परिवार भागयशाली होता है जहाँ मां होती है। माँ परिवार की दिन रात देखभाल करती है। मां के होते सभी बेफ्रिक हो जाते हैं, उन्हें मालूम होता है कि माँ सब-कुछ सँभाल लेगी। मां परिवार पर कोई भी विपत्ति नहीं आने देती। ‘माँ है ना’ कविता की ये पंक्तियाँ माँ की महानता का उल्लेख करती हैं:- दिल से दुआ देगी / बुरी नज़र वाले को / सबक सिखा देगी / मां हेै ना / सब संभाल लेगी।
कवयित्री अपने परिवेश से पूरी तरह सजग और सतर्क है। 2019 में विश्व में फैले कोविड-19 को भी अपनी कविताओं में स्थान दिया है।
इस बीमारी का शुरू- शुरू में कोई ईलाज नहीं हुआ। बस बचाव के उपाय थे। इस बीमारी ने हमारा जीवन और अर्थव्यवस्था को बहुत प्रभावित किया। इस बीमारी के बारे में कवयित्री लिखती है:- मंनोरंजन व अर्थ के / साधन भी लिये छीन। पहने मास्क, रखी दूरियाँ / फिर भी मिला भय..।
इतना ही नहीं कवयित्री की नज़र
फूलों के रंग-बिरंगे बगीचे जैसी है। इस कविता संग्रह में सावन का मौसम है, होली का पर्व है, गेंदा और गुलाब है, मंगल भाव हैं। हमारी समृद्ध संस्कृति की विरासत है। जो हमारे जीवन में निराशा दूर कर एक दूसरे को समीप ले आने की प्रसन्नता से भर देती है।
हरे- भरे वृक्ष जहां हमें आक्सीजन देते हैं वहीं सौदर्य में भी वृद्धि करते हैं। प्रकृति ने कोरोना काल में भी हमें संदेश दिया है, लेकिन समझ न पाने के कारण परेशान रहे। प्रकृति कविता की ये पंक्तियां देखिये:- प्रकृति हमें कोरोना के रूप में कुछ कह रही है/ हम समझ नहीं रहे / सनातन सत्ता परंपराओं के रूप में / समझा रही है, हम समझ नहीं रहे।
‘वक्त’ पर कवयित्री ने बहुत ही प्रभावशाली कविता लिखी है:- यह रूकता नहीं है, हमेशा चलता रहता है। अच्छा और बुरा वक्त बदलता रहता हेै। ‘शब्द’ पर संग्रह में अनेक कविताएँ हैं। शब्द का बहुत महत्व है। शब्द ही मेल कराते हैं, शब्द ही आपस में लड़ाते हैं। शब्द हमेशा गतिमान रहते हैं ..हमारे भावों में, विचारों में। शब्द ही एक दूसरे से मेल कराते हैं।
काव्य संग्रह का नामकरण भी ‘शब्दों को विश्राम कहाँ’ रखा गया है। ‘शब्दों की काया’ कविता की ये पंक्तियाँ इस भाव को व्यक्त करती हैं:- शब्दों की होती है काया/ शब्द खेलते हैं शब्दों से / लड़ते हैं, झगड़ते हैं प्यार भी करते हैं शब्द।
भाव पक्ष की तरह कला पक्ष भी सशक्त है। भाषा सहज और सरल होते हुए भी प्रभावशाली है। मुझे विश्वास है यह लघु काव्य संग्रह पाठक पसंद करेंगे।
पुस्तक:’शब्दों को विश्राम कहाँ’ (लघु काव्य- संग्रह)
लेखिका: कवयित्री संतोष गर्ग, संपादक: समदर्शी प्रकाशन
335 देवनगर,
मोदीपुरम् , मेरठ (उत्तर प्रदेश) मूल्य: 175/ पृष्ठ संख्या: 116



पुस्तकों की समीक्षा

एक व्यक्तिव
श्रीमती संतोष गर्ग ‘तोष’ एक प्रख्यात कवयित्री, लघुकथाकार, बाल उपन्यासकार और कहानीकार हैं, जिनकी लेखनी ने हिंदी साहित्य को एक नया आयाम दिया है। पंचकूला की निवासी संतोष गर्ग ने साहित्य जगत में अपनी गहरी छाप छोड़ी है और विभिन्न साहित्यिक मंचों पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वे राष्ट्रीय कवि संगम, ट्राईसिटी चंडीगढ़ प्रांत की अध्यक्ष और अखिल भारतीय साहित्य परिषद, हरियाणा प्रांत की उपाध्यक्ष हैं। इसके साथ ही, वे मनांजलि मंच, चंडीगढ़ की संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। उनकी कलम से निकली 18 से अधिक पुस्तकें साहित्य प्रेमियों के दिलों में अपनी गहरी जगह बना चुकी हैं और विविध विषयों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती हैं।
साहित्य में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा उन्हें श्रेष्ठ कृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी काव्य-प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली; 15 अगस्त 2023 को उन्हें जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में भारतीय प्रधान कौंसुलेट द्वारा सम्मानित किया गया, और आगामी जनवरी 2025 में उन्हें भारतीय उच्चायोग दुबई में प्रधान कौंसुलेट जनरल श्री सतीश कुमार सिवन द्वारा सम्मानित किया जाएगा।
श्रीमती गर्ग को 2022 में दैनिक भास्कर द्वारा ‘पावरफुल वूमेन ऑफ हरियाणा अवार्ड’ दिया गया। उनके साहित्यिक सफर में 2019 का ‘महादेवी वर्मा कविता गौरव सम्मान’ और ‘साहित्य सम्मेलन शताब्दी सम्मान’ (पटना, बिहार में गोवा की गवर्नर श्रीमती मृदुला सिन्हा द्वारा) भी उल्लेखनीय हैं। 2020 में उन्हें ‘गुरु रविंद्र नाथ टैगोर सम्मान’ से सम्मानित किया गया, जो उनकी साहित्यिक यात्रा का एक और मील का पत्थर है।
संतोष गर्ग ‘तोष’ न केवल एक सशक्त साहित्यकार हैं, बल्कि व्यवसायिक क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वे एन जी डायग्नोस्टिकस, पंचकूला की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। अपने व्यावसायिक और साहित्यिक दायित्वों के बीच सामंजस्य बैठाते हुए वे सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं। उनकी रचनाओं में नारी सशक्तिकरण, आध्यात्म, समाज सुधार और बाल साहित्य जैसे विषयों का गहरा समावेश है।
उनकी लेखनी और समर्पण भाव ने उन्हें समाज के विभिन्न वर्गों से जोड़ा है। ‘मनांजलि मंच’ जैसे साहित्यिक मंच के माध्यम से वे साहित्यकारों को जोड़ने और नई पीढ़ी को साहित्य से प्रेरित करने का कार्य करती हैं। उनकी सादगी, समाजसेवा के प्रति समर्पण और साहित्यिक प्रतिबद्धता उन्हें एक प्रेरणास्रोत बनाती है। संतोष गर्ग ‘तोष’ की लेखनी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और वे साहित्य और समाज में अपने योगदान से इतिहास रचने का कार्य कर रही हैं।
सुरेश पुष्पाकर
(कलाकार, कवि, साहित्यकार)
ग्रेट ब्रिटेन✍️